NASA का चंद्रमा मिशन 2029: फायरफ्लाई ले जाएगा रोवर्स और अत्याधुनिक उपकरण, चंद्र सतह पर होगी नई खोज
नासा और फायरफ्लाई का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर एक नया वैज्ञानिक मिशन
1 अगस्त 2025:
नासा ने चंद्रमा की सतह पर दो रोवर्स और तीन वैज्ञानिक उपकरणों को पहुंचाने के लिए टेक्सास के सीडर पार्क स्थित फायरफ्लाई एयरोस्पेस को 176.7 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट प्रदान किया है। यह कार्य नासा की CLPS (Commercial Lunar Payload Services) पहल और आर्टेमिस अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का गहन वैज्ञानिक अन्वेषण करना है।
यह पहला मौका है जब नासा एक साथ कई रोवर और स्थिर वैज्ञानिक उपकरण चंद्रमा पर भेज रहा है। इस अभियान में कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न (स्विट्जरलैंड) का भी सहयोग शामिल है। इस मिशन के तहत चंद्र सतह की रासायनिक संरचना को समझने, जल बर्फ जैसे संसाधनों की खोज और भविष्य में इंसानों की लंबी अवधि की उपस्थिति को संभव बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर जोएल कर्न्स ने कहा,
“CLPS के जरिए नासा एक नई युग की शुरुआत कर रहा है, जिसमें वाणिज्यिक कंपनियां चंद्र अन्वेषण में नेतृत्व कर रही हैं। यह मिशन न केवल विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि चंद्रमा पर मानव उपस्थिति के लिए आवश्यक संसाधनों और वातावरण की भी गहरी समझ प्रदान करेगा।”
फायरफ्लाई का यह पांचवां CLPS टास्क ऑर्डर है और चौथा चंद्र अभियान होगा। 2029 में इस लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने का लक्ष्य है। इससे पहले फायरफ्लाई ने मार्च 2025 में पहली सफल लैंडिंग चंद्रमा की समीपवर्ती सतह पर की थी।
इस मिशन के प्रमुख उपकरण और रोवर्स:
🔹 CSA रोवर:
यह रोवर चंद्रमा के स्थायी रूप से छाया में रहने वाले क्षेत्रों की खोज करेगा। इसमें स्टीरियो कैमरे, न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर, थर्मल इमेजिंग रेडियोमीटर और रेडिएशन डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं। इसका उद्देश्य चंद्रमा की भूगर्भीय इतिहास और संसाधनों जैसे जल बर्फ को समझना है।
🔹 मूनरेन्जर माइक्रोरोवर:
NASA के एम्स रिसर्च सेंटर और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित यह स्वायत्त रोवर हाइड्रोजन युक्त तत्वों और चंद्र मिट्टी की संरचना का विश्लेषण करेगा।
🔹 लेज़र आयनाइजेशन मास स्पेक्ट्रोमीटर:
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न द्वारा विकसित यह उपकरण Firefly के रोबोटिक आर्म और टाइटेनियम फावड़े की मदद से चंद्र मिट्टी के सैंपल एकत्र करेगा और उनमें मौजूद तत्वों का विश्लेषण करेगा।
🔹 स्टीरियो कैमरा प्लम स्टडी सिस्टम:
यह NASA लैंग्ले रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित किया गया है और लैंडिंग के दौरान रॉकेट के निकास से चंद्र सतह पर होने वाले प्रभावों की उच्च गुणवत्ता वाली स्टेरियो इमेज के जरिए जांच करेगा।
🔹 लेज़र रेट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे:
NASA के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर द्वारा तैयार यह निष्क्रिय ऑप्टिकल उपकरण चंद्रमा पर दशकों तक एक स्थायी मार्कर के रूप में कार्य करेगा, जिससे भविष्य की दूरी मापन तकनीकों को सहायता मिलेगी।
CLPS कार्यक्रम के अंतर्गत, NASA अमेरिकी कंपनियों से वैज्ञानिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन इकाइयों को चंद्रमा पर भेजने के लिए सेवाएं लेता है। यह पहल न केवल विज्ञान और अन्वेषण को बढ़ावा देती है, बल्कि चंद्र अर्थव्यवस्था को भी गति देती है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.nasa.gov/clps

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