NASA की नई टेक्नोलॉजी से होगी मंगल पर सटीक लैंडिंग, सुपरसोनिक पैराशूट का ट्रायल पूरा
नासा ने सुपरसोनिक पैराशूट डिलीवरी के लिए किया सफल परीक्षण, मंगल मिशनों को मिलेगा नया सहारा
4 जून, 2025 को कैलिफोर्निया में हुआ रोमांचक प्रयोग
एडवर्ड्स, कैलिफोर्निया – नासा ने 4 जून 2025 को अपने आर्मस्ट्रॉन्ग फ्लाइट रिसर्च सेंटर (Armstrong Flight Research Center) में एक अहम और अत्याधुनिक परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस परीक्षण के तहत 'Enhancing Parachutes by Instrumenting the Canopy' नामक परियोजना के अंतर्गत एक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया सुपरसोनिक पैराशूट एक ड्रोन से छोड़ी गई कैप्सूल के साथ आसमान में खोला गया।
यह पैराशूट, जिसे Alta X ड्रोन से छोड़ा गया था, न केवल पूरी तरह से खुला बल्कि इसके कैनोपी (canopy) में लगे उन्नत उपकरणों ने रीयल-टाइम डेटा भी एकत्र किया। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह पर वैज्ञानिक उपकरणों और पेलोड की सुरक्षित और सटीक लैंडिंग सुनिश्चित करना है।
परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने सूखी झील की सतह पर उतरे कैप्सूल और पैराशूट की बारीकी से जांच की। यह प्रयोग भविष्य के मंगल मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यह सुनिश्चित करता है कि सुपरसोनिक गति से उतरते समय उपकरण सुरक्षित रूप से नीचे पहुंचें।
नासा की इस तकनीक से:
मंगल ग्रह पर मिशनों की विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी।
वैज्ञानिक उपकरणों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित होगी।
भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा।
इस परीक्षण ने यह साबित कर दिया है कि नासा सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं, बल्कि हर कदम मंगल और उससे आगे की तैयारी कर रहा है।
📸 फोटो विवरण:
नीले आसमान के नीचे पूरी तरह फैला हुआ सुपरसोनिक पैराशूट।
वैज्ञानिक टीम द्वारा जमीन पर उतरे कैप्सूल और पैराशूट की जांच।
स्रोत: नासा / क्रिस्टोफर एल.सी. क्लार्क
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