ISRO का HOPE मिशन लद्दाख से अंतरिक्ष की ओर: त्सो कर में शुरू हुआ मानव अंतरिक्ष उड़ान का पूर्वाभ्यास
इसरो ने लद्दाख के त्सो कर घाटी में किया "स्पेस एनालॉग मिशन HOPE" का आयोजन
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HOPE Setup at Tso Kar Valley, Ladakh |
भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Indian Human Spaceflight Programme) इसरो के नेतृत्व में एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मिशन है, जिसका लक्ष्य पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में मानव को भेजने के साथ-साथ वर्ष 2040 तक भारतीय मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग को साकार करना है। इस दिशा में, मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़ी शारीरिक, मानसिक और संचालन संबंधी चुनौतियों को समझने के लिए ‘एनालॉग मिशन’ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (HSFC) ने इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 31 जुलाई, 2025 को त्सो कर घाटी, लद्दाख में "हिमालयन आउटपोस्ट फॉर प्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन (HOPE)" नामक विशेष स्पेस एनालॉग मिशन की शुरुआत की गई। इसका उद्घाटन इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने किया।
डॉ. नारायणन ने उद्घाटन के दौरान कहा, “यह एनालॉग मिशन केवल एक सिमुलेशन नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य की तैयारी है। यह मिशन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘स्पेस फॉर ऑल’ विज़न को साकार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है, जहां भारतीय उद्योग को भी अंतरिक्ष क्षेत्र में व्यापक भागीदारी का अवसर मिला है।”
इसरो और उद्योग भागीदारों के सहयोग से आयोजित इस मिशन में भारत के प्रमुख शिक्षण संस्थानों – IIST व RGCB (त्रिवेंद्रम), IIT हैदराबाद, IIT बॉम्बे और इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन, बेंगलुरु – के विशेषज्ञ शामिल हैं। 1 से 10 अगस्त, 2025 तक चलने वाले इस HOPE मिशन में दो चयनित क्रू मेंबरों पर एपिजेनेटिक, जीनोमिक, शारीरिक और मानसिक प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, ग्रह सतह संचालन, नमूना संग्रह और माइक्रोबियल विश्लेषण तकनीकों को भी परखा जाएगा।
HOPE मिशन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया 8 मीटर व्यास का हैबिटेट मॉड्यूल (रहने के लिए) और 5 मीटर व्यास का यूटिलिटी मॉड्यूल (संचालन और सपोर्ट सिस्टम) एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिससे क्रू के लिए बेहतर वर्कफ़्लो सुनिश्चित होता है।
त्सो कर घाटी को मिशन के लिए चुना गया क्योंकि इसकी जलवायु प्रारंभिक मंगल ग्रह से मिलती-जुलती है – यहां की अत्यधिक UV किरणें, कम वायुदाब, ठंडे तापमान और लवणीय पर्माफ्रॉस्ट इसे आदर्श एनालॉग बनाते हैं।
यह मिशन न केवल भारतीय अंतरिक्ष अन्वेषण की नींव को मज़बूत करेगा, बल्कि भविष्य की मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण डेटा और अनुभव भी प्रदान करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
www.isro.gov.in

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