देश का हर नागरिक अब बैंकिंग से जुड़ा: जन धन योजना के 10 साल, 55 करोड़ खातों का सफर | #JanDhanSuccess
जन धन योजना ने तोड़ा नया रिकॉर्ड: 55 करोड़ खाते, ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक जमा
10 वर्षों में बना दुनिया का सबसे बड़ा फाइनेंशियल इन्क्लूजन अभियान
4 अगस्त 2025
भारत की प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने देश में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि इस योजना के तहत खोले गए बैंक खातों की संख्या 55 करोड़ के पार पहुंच गई है। इनमें से अधिकांश खाते ऐसे नागरिकों के हैं जो कभी बैंक की दहलीज तक नहीं पहुंचे थे।
वित्त मंत्री का संदेश:
“जन धन योजना के 10 साल पूरे होने पर और केवाईसी प्रक्रिया की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए, हमने बैंकों से कहा है कि वे देश के हर कोने तक पहुंचें और प्रक्रिया को सरल बनाएं।”
KYC अपडेट अभियान जोरों पर:
1 जुलाई 2025 से शुरू हुए इस विशेष अभियान में अब तक 1 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को कवर किया जा चुका है। जन धन खाताधारकों से इन शिविरों में भाग लेकर अपनी KYC प्रक्रिया पूर्ण करने की अपील की गई है।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
1. 56% खाते महिलाओं के नाम
2. ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक की जमा राशि
3. 80% से अधिक खाते सक्रिय
4. 66.6% खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में
5. 29.5 करोड़ महिला खाताधारक
बदलती बैंकिंग तस्वीर:
मार्च 2015 में जहां एक खाते में औसतन ₹1,065 जमा होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा ₹4,352 तक पहुंच गया है — यह वित्तीय स्थायित्व की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
RBI का समर्थन:
RBI के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने भी जन धन योजना को भारत के वित्तीय इतिहास में एक परिवर्तनकारी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अब तक का सबसे बड़ा फाइनेंशियल इन्क्लूजन प्रोग्राम बन गई है।
सहायता के कई रूप:
यह योजना मनरेगा वेतन, उज्ज्वला सब्सिडी, और कोविड राहत के वितरण में भी केंद्र सरकार की रीढ़ बनी है। साथ ही, इस योजना का उद्देश्य देश के कम आय वर्गों को बैंकिंग, बीमा और पेंशन जैसी सेवाओं से जोड़ना है।
अब हर गांव बैंकिंग की पहुंच में:
आज देश के 99.95% बसे गांवों के लोग 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग टचपॉइंट्स (बैंक शाखा, ATM, बीसी, डाक बैंक आदि) से जुड़ चुके हैं।

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